30 Comments

  1. चश्म लिखता हूँ,
    होंठ लिखता हूँ
    और अदा लिखता हूँ

    मैं जब भी लिखता हूँ तो बस तेरा चेहरा लिखता हूँ

    इत्तिफाकन कभी पढ़ो मुझको, तो पता चलेगा तुम्हें

    ज़िक्र खुदा का जहाँ आये तो तुम्हे खुदा लिखता हूँ

    मेरी ग़ज़ल में जहाँ भी तेरी खामोशी का ज़िक्र आया

    लोग कहने लगे वहाँ कि मैं बहुत गहरा लिखता हूँ

    माफ कर देना मेरी गुस्ताखियों को देख कर के भी

    मैं अब भी अक्सर खुद को तुम्हारा लिखता हूँ

    जब जब भी तबियत मेरी ज़रा सी बिगड़ जाती है

    मैं तेरी तस्वीर को ही बस अपनी दवा लिखता हूँ

  2. Bhai listing toh ki hai sellers ne but itne price me sales kitni hoti hai? Main samajh sakti hoon ki kuch log local bazar tak pahunch nahi sakte ya unke Paas time nahi hota hai Jaa kar locally yeh kharidna ka ya wo jante nahi kahan se kharidna, isliye woh online lete hain Yeh items. But mera question hai ki agar maine is type ke items list kiye toh sales potential kya hai inki.

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